
@ 13 नवंबर नहाय-खाय से होगी महापर्व की शुरुआत, 15 नवंबर को अस्ताचलगामी और 16 नवंबर को उदीयमान सूर्य को अर्पित किया जाएगा अर्घ्य।
प्रदीप विद्रोही
भागलपुर।
दीपावली की तैयारियों के साथ ही घर-आंगन में छठी मैया के स्वागत की तैयारी भी शुरू हो गई है। लोक आस्था, पवित्रता, त्याग और अटूट श्रद्धा का महापर्व छठ अब दस्तक देने लगा है। चार दिनों तक चलने वाले इस कठिन व्रत को लेकर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह और भक्तिमय वातावरण देखने को मिल रहा है। घरों की साफ-सफाई, रंगाई-पुताई से लेकर पूजा में इस्तेमाल होने वाले बर्तनों और सामग्रियों को सहेजने का सिलसिला शुरू हो गया है। देश के विभिन्न हिस्सों में रहने वाले परवैतीन सपरिवार अपने – अपने पुश्तैनी घर यानी गांव पहुंच चुके हैं।
छठ महापर्व केवल एक पूजा नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति कृतज्ञता, परिवार की सुख-समृद्धि और संतान की मंगलकामना का अनुपम पर्व है। इस महापर्व में शुद्धता और पवित्रता का विशेष महत्व होता है। यही वजह है कि पूजा की तैयारियों में जुटने से पहले व्रती महिलाओं सहित घर की अन्य महिलाएं विधिवत स्नान कर स्वयं को शुद्ध करती हैं। इसके बाद दीपावली की तैयारी के साथ छठ पूजा में उपयोग होने वाले बर्तनों और सामग्रियों को विशेष रूप से साफ कर सुरक्षित कमरे में रखा जाता है। घर के छठ पूजा कक्ष की सफाई और पवित्रता का भी पूरा ध्यान रखा जाता है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, दीपावली आठ नवंबर को मनाई जाएगी। पश्चात 13 नवंबर, शुक्रवार से नहाय-खाय के साथ चार दिवसीय छठ महापर्व का शुभारंभ होगा। 14 नवंबर, शनिवार को खरना का अनुष्ठान संपन्न होगा। इस दिन व्रती पूरे दिन उपवास रखकर संध्या में भगवान सूर्य की आराधना के बाद प्रसाद ग्रहण करेंगे और इसके साथ ही 36 घंटे के निर्जला व्रत का संकल्प शुरू होगा।
15 नवंबर, रविवार को अस्ताचलगामी सूर्य को पहला अर्घ्य अर्पित किया जाएगा। वहीं, 16 नवंबर, सोमवार को उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने के साथ इस महापर्व का विधिवत समापन होगा। इस दौरान घाटों पर श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा। छठी मैया के मधुर गीतों से वातावरण भक्तिमय हो उठेगा और व्रती पूरे समर्पण भाव से भगवान भास्कर की आराधना करेंगे।
छठ महापर्व का चार दिवसीय कार्यक्रम

13 नवंबर, शुक्रवार: नहाय-खाय
14 नवंबर, शनिवार: खरना
15 नवंबर, रविवार: सायंकालीन अर्घ्य – शाम 5:18 बजे
16 नवंबर, सोमवार: प्रातःकालीन अर्घ्य – सुबह 6:33 बजे
भागलपुर और आस-पास के इलाके में अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देने के लिए शाम 5:18 बजे और उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने के लिए सुबह 6:33 बजे का समय बताया गया है।
छठ महापर्व के आगमन के साथ ही चारों ओर छठी मैया के जयकारे गूंजने लगेंगे। घरों में पारंपरिक पकवानों की खुशबू और घाटों पर दीपों की जगमगाहट के बीच श्रद्धा का अनुपम दृश्य साकार होगा। आस्था का यह महापर्व एक बार फिर लोगों को पवित्रता, संयम, सेवा और सामाजिक एकता का संदेश देगा।















