
@ बर्खास्त संविदा कंप्यूटर ऑपरेटर पर प्राथमिकी की तैयारी।
प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। जिला शिक्षा विभाग में डिजिटल व्यवस्था और ऑनलाइन वेतन प्रणाली का कथित दुरुपयोग कर सरकारी राशि में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी किए जाने का मामला सामने आया है। मानव संसाधन प्रबंधन प्रणाली (HRMS) की पटना स्थित केंद्रीय जांच में ‘तनुश्री’ नाम से एक फर्जी विशिष्ट शिक्षिका की आईडी बनाए जाने और उसके माध्यम से करीब एक करोड़ रुपये के संदिग्ध लेनदेन का मामला सामने आया है।

प्राथमिक विभागीय जांच में इस मामले में स्थापना शाखा में संविदा पर कार्यरत रहे कंप्यूटर ऑपरेटर अविनाश राज, निवासी शिवपुरी कॉलोनी, मीरजानहाट, भागलपुर की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (स्थापना) शशि चंदन चौधरी ने आरोपी ऑपरेटर के खिलाफ साइबर थाने में नामजद प्राथमिकी दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
फर्जी आईडी में अपलोड किए गए जाली दस्तावेज:
विभागीय पड़ताल के अनुसार, फर्जी शिक्षिका की आईडी अप्रैल 2026 में तैयार की गई। इसे सिस्टम में वैध दिखाने के लिए कथित तौर पर फर्जी पैन कार्ड, मनगढ़ंत PRAN नंबर और अन्य दस्तावेज अपलोड किए गए। इसके बाद इस आईडी को वेतन भुगतान की प्रक्रिया से जोड़ा गया।जांच में यह भी सामने आया है कि वेतन के लिए जिस बैंक खाते को लिंक किया गया, वह जनधन खाता बताया जा रहा है। शुरुआत में अप्रैल से जून के बीच इस खाते में 30 हजार से 50 हजार रुपये तक के कई छोटे लेनदेन वेतन और एरियर के नाम पर किए गए।
संविदा खत्म होने के बाद भी 67 लाख के लेनदेन का आरोप:

विभाग ने अविनाश राज की संदिग्ध कार्यशैली को देखते हुए जून में उसकी संविदा समाप्त कर दी थी। हालांकि, विभागीय प्रारंभिक वित्तीय जांच के अनुसार, इसके बाद भी फर्जी आईडी के माध्यम से बड़े लेनदेन किए गए।जांच में पिछले दो महीनों में दो अलग-अलग मौकों पर करीब 27 लाख और 40 लाख रुपये, यानी कुल 67 लाख रुपये के संदिग्ध लेनदेन की जानकारी सामने आयी है। इन लेनदेन की पूरी मनी ट्रेल की जांच की जा रही है।
फरीदाबाद से भागलपुर तक मनी ट्रेल की जांच:
जांच में सरकारी राशि को पहले हरियाणा के फरीदाबाद स्थित एक बैंक खाते में भेजे जाने और उसके बाद वहां से भागलपुर के बैंक खाते में राशि ट्रांसफर किए जाने की जानकारी सामने आने की बात कही जा रही है।सूत्रों के अनुसार, आरोपी के परिवार के कुछ सदस्य फरीदाबाद में रहते हैं। ऐसे में जांच टीम फरीदाबाद से भागलपुर तक हुए कथित वित्तीय लेनदेन और संबंधित बैंक खातों की पड़ताल कर रही है।
HRMS के ‘एडिट’ विकल्प पर उठे सवाल:
मामले ने शिक्षा विभाग के HRMS पोर्टल की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। विभागीय स्तर पर यह जांच की जा रही है कि पोर्टल के ‘एडिट’ विकल्प का इस्तेमाल कर फर्जी जानकारी किस तरह दर्ज की गयी।बताया जा रहा है कि HRMS में शिक्षकों के विभिन्न भत्तों समेत अन्य विवरणों को अपडेट करने के लिए एडिट का विकल्प उपलब्ध है। जांच एजेंसी और विभागीय अधिकारी यह पता लगाने में जुटे हैं कि इसी तकनीकी सुविधा का दुरुपयोग कर फर्जी शिक्षिका की आईडी तैयार करने और भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ाने में किस-किस की भूमिका रही।
अन्य फर्जी आईडी की भी होगी जांच:
मामला सामने आने के बाद अब शिक्षा विभाग के डिजिटल रिकॉर्ड की व्यापक जांच की तैयारी है। यह पता लगाया जाएगा कि क्या ‘तनुश्री’ नाम की आईडी तक ही मामला सीमित था या HRMS में अन्य संदिग्ध आईडी भी तैयार की गयी थीं।साइबर थाना पुलिस और विभागीय ऑडिट टीम डिजिटल लॉग, बैंक लेनदेन, अपलोड किए गए दस्तावेज और संबंधित कर्मचारियों की भूमिका की जांच करेगी। प्राथमिकी दर्ज होने के बाद जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।















