5
(2)

प्रदीप विद्रोही

भागलपुर। इस त्यौहारी मौसम में विक्रमशिला सेतु पर आवागमन प्रभावित होने के बाद भागलपुर और नवगछिया के बीच आने-जाने वाले यात्रियों के लिए गंगा का जलमार्ग एक महत्वपूर्ण सहारा बन गया है। भागलपुर-नवगछिया जहाज यात्रा विभिन्न घाटों पर यात्रियों की भारी भीड़ देखने को मिल रही है। सुबह से ही गंगा पार करने के लिए बड़ी संख्या में लोग घाटों पर पहुंचते रहे, जिसके कारण कई स्थानों पर अफरा-तफरी जैसी स्थिति बन रही है।


जहाज पर उतरने – चढ़ने के दौरान दोपहिया वाहन चालक खूब गिर रहे हैं। यात्रियों को घंटों इंतजार के बाद भी जहाज में जगह नहीं मिल रही है। यात्रियों की शिकायत थी कि 12 में से महज पांच जहाज का परिचालन हो रहा है। वहीं जिला प्रशासन ने तीनों घाटों पर शाम 5:30 बजे के बाद नाव-फेरी और कार्गो परिचालन सुरक्षा के दृष्टिकोण से बंद करने का ऐलान कर दिया है। बड़ी संख्या में यात्री जलमार्ग का रुख कर रहे हैं। सामान्य दिनों की तुलना में जहाज सेवा पर यात्रियों का दबाव काफी बढ़ गया है। प्रति दिन पांच सौ से भी अधिक दो पहिया वाहनों की आवाजाही हो रही है।
घाटों पर बढ़ता दबाव, जहाजों पर भीड़:
जहाज सेवा शुरू होने के साथ ही गंगा के दोनों किनारों पर यात्रियों की आवाजाही तेज हो गई। नौकरी, कारोबार, पढ़ाई, इलाज और अन्य जरूरी कामों से प्रतिदिन भागलपुर और नवगछिया के बीच आने-जाने वाले लोगों के लिए जलमार्ग फिलहाल वैकल्पिक परिवहन का प्रमुख माध्यम बनता दिखाई दे रहा है। घाटों पर यात्रियों की संख्या बढ़ने के कारण जहाजों पर सवार होने और उतरने के दौरान भीड़ को नियंत्रित करना बड़ी चुनौती बन गया है। यात्रियों के बढ़ते दबाव के बीच सुरक्षा व्यवस्था और नावों की क्षमता का पालन बेहद महत्वपूर्ण हो गया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि यात्रियों की संख्या इसी तरह बढ़ती रही तो घाटों पर व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त इंतजाम की जरूरत पड़ेगी। खासकर महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों और बीमार यात्रियों के लिए भीड़ के बीच सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
कभी भी बड़े हादसे का बन सकता है कारण:
गंगा पार करने के लिए यात्रियों की अप्रत्याशित भीड़ को देखते हुए सुरक्षा को लेकर चिंता भी बढ़ी है। जहाजों में निर्धारित क्षमता से अधिक यात्रियों के सवार होने, घाट पर धक्का-मुक्की और नाव में चढ़ने-उतरने के दौरान संतुलन बिगड़ने जैसी परिस्थितियां अब दिखने लगी है।
प्रशासन ने कड़े फैसलों पर दिया जोर:
यात्रियों की अप्रत्याशित भीड़ को देखते हुए प्रशासन की ओर से भी व्यवस्था को नियंत्रित करने के लिए कई स्तरों पर कदम उठाए जाने की बात सामने आ रही है। घाटों पर भीड़ को नियंत्रित करने, नावों के परिचालन पर निगरानी रखने और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रशासनिक स्तर पर सख्ती बढ़ाई जा रही है। जलमार्ग पर बढ़े दबाव के बीच जहाज संचालकों को भी सुरक्षा मानकों का पालन करने की जरूरत है।
वैकल्पिक मार्ग ने बढ़ाई जिम्मेदारी:
विक्रमशिला सेतु से आवागमन प्रभावित होने की स्थिति में जलमार्ग लोगों के लिए राहत का विकल्प जरूर बना है, लेकिन यात्रियों की बढ़ती संख्या ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नई चुनौती खड़ी कर दी है। भागलपुर और नवगछिया के बीच बड़ी संख्या में लोगों की दैनिक आवाजाही को देखते हुए नाव सेवा को व्यवस्थित और सुरक्षित बनाए रखना प्रशासन के लिए अहम होगा।
इस त्यौहारी मौसम में घाटों पर उमड़ रही भीड़ से यह स्पष्ट है कि आने वाले दिनों में भी जलमार्ग पर यात्रियों का दबाव बना रह सकता है। ऐसे में प्रशासन, जहाज संचालकों और यात्रियों – तीनों की जिम्मेदारी बढ़ गई है। यात्रियों से भी अपील की जा रही है कि वे जल्दबाजी में जहाज पर चढ़ने की कोशिश न करें, निर्धारित क्षमता से अधिक यात्रियों वाली नाव में सवार न हों और सुरक्षा संबंधी निर्देशों का पालन करें। गंगा पार करने के दौरान थोड़ी सी लापरवाही भी गंभीर हादसे का कारण बन सकती है। इसलिए सुगम आवागमन के साथ यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देना आवश्यक है।

Aapko Yah News Kaise Laga.

Click on a star to rate it!

Average rating 5 / 5. Vote count: 2

No votes so far! Be the first to rate this post.

Share: