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नवगछिया । राष्ट्रपिता महात्मा गांधी एवं पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती की पूर्वसंध्या पर मंगलवार को राजकीय डिग्री महाविद्यालय, रंगरा चौक (तिनटंगा) में संगोष्ठी एवं स्वच्छता संबंधी गतिविधियों का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्रभारी प्राचार्य डॉ. नवीन कुमार नीरज ने की। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को गांधी और शास्त्री के विचारों, जीवन मूल्यों तथा राष्ट्र निर्माण में उनकी भूमिका से परिचित कराना था।

कार्यक्रम का मंच संचालन सहायक प्राध्यापक डॉ. समीर कुमार ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन सहायक प्राध्यापिका प्रिया कुमारी ने किया। कार्यक्रम के लिए श्यामपट पर आकर्षक पोस्टर स्नातक प्रथम छमाही की छात्रा करुणा कुमारी ने तैयार किया। छात्रा सोनी कुमारी के स्वागत गीत से कार्यक्रम की विधिवत शुरुआत हुई।

सत्य के प्रति आग्रह ने गांधी को बनाया गांधी

अध्यक्षीय संबोधन में प्रभारी प्राचार्य डॉ. नवीन कुमार नीरज ने महात्मा गांधी एवं लाल बहादुर शास्त्री को श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए उनके जीवन और विचारों पर विस्तार से चर्चा की।

उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को स्वयं से यह प्रश्न करना चाहिए कि गांधी को गांधी क्या बनाता है। इस प्रश्न का उत्तर विस्तृत हो सकता है, लेकिन संक्षेप में कहा जाए तो सत्य के प्रति उनका आग्रह ही उनके व्यक्तित्व की सबसे बड़ी विशेषता थी। गांधी सत्य के प्रति निरंतर प्रतिबद्ध रहे और इसी सत्याग्रह से उन्हें वह आत्मबल मिला, जिसके माध्यम से उन्होंने राष्ट्रीय स्वतंत्रता आंदोलन का नेतृत्व किया।

उन्होंने गांधी की आत्मकथा ‘सत्य के मेरे प्रयोग’ का उल्लेख करते हुए कहा कि यह पुस्तक गांधी के जीवन, उनके प्रयोगों और आत्ममंथन को समझने का महत्वपूर्ण माध्यम है।

डॉ. नीरज ने कहा कि जिस प्रकार गांधी के व्यक्तित्व में त्याग का विशेष महत्व था, उसी प्रकार लाल बहादुर शास्त्री के व्यक्तित्व में सादगी प्रमुख थी। शास्त्री केवल प्रधानमंत्री के रूप में ही नहीं, बल्कि चिंतक और सामाजिक विचारक के रूप में भी भारतीय समाज को दिशा देने वाले व्यक्तित्व रहे हैं।

गांधी मजबूरी नहीं, मजबूती का नाम हैं

सहायक प्राध्यापक रजनीश कुमार ने कहा कि गांधी मजबूरी नहीं, बल्कि मजबूती का नाम हैं। केवल गांधी जी की प्रतिमा पर श्रद्धा अर्पित करने की औपचारिकता पर्याप्त नहीं है। उनके विचारों और बताए रास्ते को अपने जीवन में अपनाने की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि आज देशभर में महात्मा गांधी के नाम पर अनेक सड़कें और मार्ग हैं, लेकिन आवश्यकता इस बात की है कि हम केवल गांधी मार्ग पर चलने के बजाय गांधी जी द्वारा बताए गए मार्ग पर भी चलें। उन्होंने इसे समाज के लिए आत्ममंथन का विषय बताया।

गलतियों की आत्मस्वीकृति से मिलती है आगे बढ़ने की प्रेरणा

सहायक प्राध्यापिका पुष्पा कुमारी ने महात्मा गांधी के विभिन्न ऐतिहासिक आंदोलनों और उनके व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि गांधी की महानता पर चर्चा के साथ-साथ उनके महान बनने की प्रक्रिया को समझना भी जरूरी है।

उन्होंने कहा कि गांधी गलतियों से परे नहीं थे, लेकिन अपनी गलतियों और भूलों को स्वीकार करने का उनमें साहस था। आत्मस्वीकृति के बाद ही व्यक्ति अपनी कमियों और आत्मोन्नति में बाधा बनने वाले तत्वों से संघर्ष कर सकता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में सत्य और ईमानदारी की आवश्यकता और भी अधिक है।

कर्तव्यनिष्ठा और सादगी से राष्ट्र निर्माण संभव

सहायक प्राध्यापक राजीव कुमार ने कहा कि गांधी और शास्त्री का व्यक्तित्व यह संदेश देता है कि कर्तव्यनिष्ठा, सादगी और सदाचार के माध्यम से एक सामान्य व्यक्ति भी समाज और देश के इतिहास में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।

उन्होंने कहा कि गांधी और शास्त्री की जयंती स्वयं से सवाल करने का अवसर भी है। प्रत्येक व्यक्ति को यह विचार करना चाहिए कि राष्ट्र निर्माण में उसकी अपनी भूमिका क्या है। उन्होंने विद्यार्थियों का उदाहरण देते हुए कहा कि यदि कोई विद्यार्थी ईमानदारी से पढ़ाई करता है और नियमित रूप से महाविद्यालय आता है तो यह भी राष्ट्र निर्माण में उसका योगदान है।

उन्होंने कहा कि राष्ट्र किसी एक व्यक्ति से नहीं, बल्कि हम सभी से मिलकर बनता है। बड़े-बड़े भाषणों की बजाय रोजमर्रा के जीवन में छोटे-छोटे सकारात्मक बदलाव लाकर भी बड़े परिणाम हासिल किए जा सकते हैं। गांधी और शास्त्री के जीवन से इस विचार की प्रेरणा ली जा सकती है।

विद्यार्थियों ने भाषण और कविता पाठ से रखे विचार

कार्यक्रम के पूर्वार्द्ध में स्नातक प्रथम छमाही के छात्र शोणित शेखर, अंकित कुमार और गोपाल कुमार तथा छात्राओं करुणा कुमारी, करीना कुमारी, काजल कुमारी, सुनीता कुमारी एवं आरती कुमारी सहित अन्य विद्यार्थियों ने महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री के जीवन, विचारों और योगदान पर अपने विचार रखे।

विद्यार्थियों ने भाषण देने के साथ-साथ कविताओं का पाठ भी किया। उनके वक्तव्यों में गांधी के सत्य, अहिंसा और आत्ममंथन तथा शास्त्री के सादगी, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्रसेवा से जुड़े विचारों को प्रमुखता दी गई।

स्वच्छता गतिविधियों में भी लिया हिस्सा

संगोष्ठी के साथ महाविद्यालय परिसर में स्वच्छता संबंधी गतिविधियों का भी आयोजन किया गया। विद्यार्थियों और महाविद्यालय कर्मियों ने स्वच्छता के महत्व पर चर्चा करते हुए परिसर को स्वच्छ रखने का संदेश दिया। कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को यह समझाने का प्रयास किया गया कि स्वच्छता केवल किसी एक दिन का अभियान नहीं, बल्कि दैनिक जीवन की जिम्मेदारी है।

कार्यक्रम में सहायक प्राध्यापक आशुतोष नारायण, कुमार गौरव, प्रधान लिपिक प्रिंस राज सहित महाविद्यालय के अन्य कर्मी और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री के विचारों को जीवन में अपनाने तथा समाज और राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने का संदेश दिया गया।

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