
प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। भागलपुर जिले के घोघा निवासी एवं ईंट व्यवसायी अनिरुद्ध शर्मा ने धर्मार्थ कार्यों के लिए अपनी करोड़ों रुपये मूल्य की चल एवं अचल संपत्ति सत्य कुटीर आश्रम, घोघा के नाम वसीयत कर एक अनूठी मिसाल पेश की है। नि:संतान और धार्मिक प्रवृत्ति के अनिरुद्ध शर्मा का कहना है कि उनकी जीवनभर की कमाई समाज और धर्म के कार्यों में लगे, इसी उद्देश्य से उन्होंने यह निर्णय लिया।
वसीयत के अनुसार घोघा स्थित एसबीआई बैंक शाखा को किराये पर दिया गया उनका भवन, निजी आवास तथा 20 बीघे से अधिक उपजाऊ कृषि भूमि सहित अन्य संपत्तियां सत्य कुटीर आश्रम को समर्पित की गई हैं। ब्रह्मचारी कुटी के महंथ माधव शरण जी महाराज कहते हैं अद्भुत हैं भक्त अनिरुद्ध शर्मा।
शर्मा का दावा है कि इन संपत्तियों का कुल मूल्य लगभग 25 करोड़ रुपये से अधिक है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि बैंक भवन से प्राप्त होने वाली लगभग दो लाख रुपये मासिक किराये की आय तथा कृषि भूमि से होने वाली आमदनी का उपयोग स्थायी रूप से धार्मिक एवं जनकल्याणकारी कार्यों में किया जाएगा।
अनिरुद्ध शर्मा ने बताया कि यदि जिले में कहीं भी धार्मिक आयोजन या धर्मार्थ कार्य होगा, तो उनकी दान की गई संपत्ति से प्राप्त आय का उपयोग उसमें भी किया जा सकेगा। उनका उद्देश्य है कि आर्थिक संसाधनों के अभाव में कोई धार्मिक कार्य बाधित न हो।
जीवनकाल में ही कर चुके हैं अपना श्राद्ध:
अनिरुद्ध शर्मा अपने धार्मिक जीवन और अनोखे निर्णयों के लिए भी जाने जाते हैं। लगभग 15 वर्ष पूर्व उन्होंने अपने जीवनकाल में ही वैदिक रीति-रिवाज से अपना श्राद्ध कर्म संपन्न कराया था। उनका मानना है कि मनुष्य को अपने जीवन में ही सांसारिक मोह से ऊपर उठकर समाज और धर्म के लिए कार्य करना चाहिए।
ईंट व्यवसाय से बनाई पहचान:
मूल रूप से सबौर थाना क्षेत्र के शंकरपुर निवासी अनिरुद्ध शर्मा के पिता स्वर्गीय प्रयाग शर्मा थे। विवाह के बाद वे घोघा में ही बस गए। उनकी पत्नी प्रमिला देवी का तीन वर्ष पूर्व निधन हो चुका है और उनकी कोई संतान नहीं है।
वर्ष 1974 से ईंट व्यवसाय से जुड़े अनिरुद्ध शर्मा घोघा क्षेत्र के पुराने एवं प्रतिष्ठित ईंट व्यवसायियों में गिने जाते हैं। उनके ईंट का ब्रांड एसपीसी (SPC) के नाम से जाना जाता है। जिस समय उन्होंने व्यवसाय शुरू किया था, उस समय घोघा क्षेत्र में गिने-चुने ईंट-भट्ठे थे, जबकि आज उनकी संख्या कई दर्जन हो चुकी है।
वर्षों से कर रहे हैं धार्मिक सेवा:
धार्मिक कार्यों में उनकी आस्था लंबे समय से रही है। देवघर और बाबा बासुकीनाथ धाम में कांवरियों की सुविधा के लिए उन्होंने अपने निजी खर्च से कई कमरे बनवाए हैं। इसके अलावा वे विभिन्न धार्मिक आयोजनों में सक्रिय रूप से सहयोग और भागीदारी करते रहे हैं।
वसीयत में यह भी उल्लेख किया गया है कि दान की गई संपत्ति पर भविष्य में किसी रिश्तेदार या अन्य परिजन का कोई दावा या अधिकार नहीं होगा तथा इसका उपयोग केवल वसीयत में वर्णित धर्मार्थ उद्देश्यों के लिए ही किया जाएगा।












