
@ घर-घर जांच और मुफ्त इलाज का दावा, जमीनी तस्वीर ने दवा वितरण व्यवस्था पर उठाए सवाल।
प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। जिले में 25 अगस्त से 30 नवंबर 2026 तक 90 दिवसीय विशेष ‘एनीमिया मुक्त बिहार’ अभियान चलाया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, इसके लिए माइक्रो-प्लान तैयार किया गया है तथा शिक्षा विभाग और आईसीडीएस के साथ समन्वय कर विद्यालयों एवं आंगनवाड़ी केंद्रों पर लाभार्थियों की शत-प्रतिशत ट्रैकिंग की जानी है। इसी बीच कहलगांव स्थित एनजीआर सर्विस रोड जो नारायणपुर गेट से महागामा (झारखंड) की ओर जाती है में सड़क किनारे 100 से अधिक सिरप की बोतलें फेंकी मिलीं, जिससे दवाओं के वितरण और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। उक्त सिरप की बोतलों पर साफ़ तौर पर लिखा है – ‘गवर्नमेंट सप्लाई, नोट फोर सेल।’
मालूम हो कि अभियान के तहत बच्चों, किशोरियों, गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं और पुरुषों की एनीमिया जांच के साथ आवश्यक दवाएं उपलब्ध कराने का प्रावधान है। जिले में इसकी जिम्मेदारी सदर अस्पताल, भागलपुर के अलावा अनुमंडलीय अस्पताल, नवगछिया और कहलगांव को दी गई है। इनके अधीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर भी हीमोग्लोबिन जांच और निःशुल्क उपचार की व्यवस्था किए जाने की बात कही गई है।

सड़क किनारे कैसे पहुंचीं दवाएं:
कहलगांव में बड़ी संख्या में सिरप की बोतलें मिलने के बाद मुख्य सवाल यह है कि लाभार्थियों तक पहुंचाई जाने वाली दवाएं सड़क किनारे कैसे पहुंचीं। क्या संबंधित दवाओं का स्टॉक मिलान किया गया था और किस स्वास्थ्य केंद्र को कितनी मात्रा में दवा उपलब्ध कराई गई थी? इन बिंदुओं की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
अभियान के तहत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, स्वास्थ्य उपकेंद्रों, आयुष आरोग्य मंदिरों, आंगनवाड़ी केंद्रों तथा सरकारी एवं सहायता प्राप्त विद्यालयों में विशेष शिविर लगाकर हीमोग्लोबिन जांच और दवा वितरण किया जाना है। गंभीर एनीमिया से पीड़ित मरीजों को अस्पताल में भर्ती कर Ferric Carboxymaltose (FCM) की खुराक देने की भी व्यवस्था बताई गई है।
घर-घर जांच और जागरूकता का दावा:

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, आशा और एएनएम कार्यकर्ताओं को अभियान का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने की जिम्मेदारी दी गई है। घर-घर जाकर जांच के साथ लोगों को एनीमिया से बचाव के लिए हरी पत्तेदार सब्जियां, गुड़, चना, सहजन और विटामिन-C युक्त आहार के सेवन के प्रति जागरूक किया जाना है।
ऐसे में सड़क किनारे दवाओं की बोतलें मिलना अभियान की दवा आपूर्ति, वितरण और निगरानी व्यवस्था की वास्तविक स्थिति को लेकर सवाल खड़े करता है। सड़क किनारे मिली दवाएं किस स्वास्थ्य केंद्र या अभियान से संबंधित हैं, इसका जवाब संबंधित जांच के बाद ही सामने आएगा।















