


प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। सरकारी राजस्व और लंबित लोक मांग की वसूली में तेजी लाने के लिए जिला प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। समाहर्ता की अनुशंसा पर बिहार एवं उड़ीसा लोक मांग वसूली अधिनियम, 1914 की धारा 3(3) के तहत जिले के 71 पदाधिकारियों को नीलाम पत्र पदाधिकारी (सर्टिफिकेट ऑफिसर) की शक्ति प्रदान की गई है।
22 सितंबर को जारी आदेश के तहत जिला, अनुमंडल और प्रखंड स्तर के अधिकारियों को उनके निर्धारित क्षेत्र में लंबित सर्टिफिकेट मामलों की सुनवाई और वसूली की कार्रवाई का अधिकार मिला है। इनमें राज्य कर, कृषि, खाद्य आपूर्ति, समाज कल्याण, कोषागार, निबंधन, मत्स्य, पशुपालन और उद्यान समेत कई विभागों के अधिकारी शामिल हैं।
नोटिस से कुर्की-नीलामी तक कार्रवाई
अधिकार मिलने के बाद संबंधित अधिकारी लोक मांग वसूली से जुड़े मामलों में नियमानुसार नोटिस जारी करने, सुनवाई करने तथा वसूली की कार्रवाई कर सकेंगे। नियमों के तहत बकाया नहीं चुकाने पर संपत्ति की कुर्की और नीलामी की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जा सकेगी।

अनुमंडल स्तर पर अनुमंडल कृषि पदाधिकारी और सहायक जिला आपूर्ति पदाधिकारियों को भी अपने क्षेत्र के मामलों में सुनवाई और वसूली आदेश पारित करने का प्राधिकार दिया गया है।
15 प्रखंडों के अधिकारी भी शामिल
प्रखंड स्तर पर सबौर, नाथनगर, शाहकुंड, सुल्तानगंज, पीरपैंती, कहलगांव, जगदीशपुर, गोपालपुर, बिहपुर, नारायणपुर, नवगछिया, इस्माईलपुर, रंगरा चौक, खरीक समेत 15 प्रखंडों के प्रखंड कृषि पदाधिकारी, प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी और प्रखंड कल्याण पदाधिकारियों को भी सर्टिफिकेट ऑफिसर की शक्ति दी गई है।
प्रशासन का उद्देश्य लंबित लोक मांग और सर्टिफिकेट मामलों के त्वरित निष्पादन के साथ सरकारी बकाये की वसूली को प्रभावी बनाना है।

















